Thursday, 14 April 2016

बाबा साहेब का देश के लिए योगदान

भारत की मुद्रा समस्या के बारे में डॉ अंबेडकर ने हिल्टन युवा आयोग के सामने जो विचार प्रस्तुत किए वे उनकी मुद्रा समस्या के विषय में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट सन 1926 में प्रस्तुत की।  इसी रिपोर्ट के आधार पर 1 अप्रैल 1935 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हुई ।

श्रमिक कल्याणकारी कानून और डॉ अंबेडकर (भविष्य  निधि (PF) और रोजगार कार्यालय के जनक)

2 जुलाई, 1942 को वाइसरॉय की एक्जिक्यूटिव कौंसिल में डॉ अंबेडकर को श्रम सदस्य (वर्तमान समय में लेबर मिनिस्टर ) के रूप में शामिल किया गया । मालिक मजदूरों के तमाम संघर्षों में उन्होने मजदूरों का साथ दिया । 7 मई 1943 को उन्होंने त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन द्वारा संस्थापित स्थायी श्रम समितियां और रोजगार कार्यालय स्थापित करने के लिए पहल किया । आज जो हम हर जिले में रोजगार कार्यालय (इम्प्लॉइमेंट एक्स्चेंज ) देख रहे हैं, वो डॉ अंबेडकर की ही देन है । श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए उन्होने भविष्य निधि योजना ( प्रोविडेंट फ़ंड ) लागू करवाया । उन्होंने नौकरीपेशा लोगों के लिए काम के घंटे तय करने में भी भूमिका निभाई। उनका मानना था कि एक व्येक्ति का काम करने का घंटा निश्चित रहना चाहिए।
अप्रैल 1944 में डॉ. अंबेडकर ने एक संशोधन बिल पेश किया कि निरंतर काम करने वाले मजदूरों को सवेतन अवकाश दिया जाए ।  नवंबर 1945 में उन्होंतने उड़ीसा में वहां की नदियों के विकास के लिए एक बहुउद्देशीय योजना शुरू की जो अंतत: हीराकुंड बांध के रूप में कारगर हुई। डॉ. आंबेडकर ने हीरा कुंड बांध योजना में महत्वीपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. आंबेडकर का मानना था कि जल मार्गों का विकास कर सस्ते  यातायात को बढ़ावा दिया जा सकता है। उनका कहना था कि बिजली का उत्पासदन और सिंचाई योजनाओं का विकास भारत के औद्योगिकरण के लिए और आर्थिक विकास के लिए अति आावश्ययक है। उन्होंकने भारत की खनिज संपदा के विकास और उत्खनन के लिए एक विस्तृ‍त योजना प्रस्तुत की और जोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का पुनर्गठन किया।
(आनंद श्रीकृष्ण जी के वॉल से)

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