हिंदू धर्म का धीरे धीरे जातिवाङा आ रहा है!
ना तो ये स्वर्ण जाति वाले अपनी हेकड़ी छोङते हैं
और ना ही पिछङी जातियाँ बेवकूफी छोङती है! अगर किसी घर में किसी को मुकम्मल मान सम्मान नही मिल रहा है तो उसे घर नहीं छोङना चाहिए,
उसे अपना सम्मान पाने के लिए संघर्ष करना चाहिए! वो संघर्ष किसी भी हद तक हो सकता है!
वरना घर तो बुझदिल छोङते हैं! आज ये जो कई पिछङी जाति के लोगों ने बाबा साहेब के अनुसार बोध्दवाद की जो रट लगा रखी है वो हिन्दू धर्म को बांटने की बहुत बड़ी साजिश है!
मेरा मानना है कि अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा देकर, उन्हें सक्षम बनाकर पिछडी जातियाँ इन परिस्थितियों से जीत सकते हैं!
सभी पिछङे वर्ग के लोगों का इतिहास बहुत शानदार रहा है और सनातन धर्म में बहुत बड़ा योगदान रहा है!
राजपूत हो या कोई और जाति आज वे उनसे किसी भी मामले में कम नहीं है! धीरज रखे!!
आज इस काबिल तो है कि इनसे मुकाबला कर रहे है,
आने वाले वक्त में इनसे आगे होंगे!
मैदान मत छोङो!
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Thursday, 19 November 2015
हिंदू धर्म मैं जातिवाद
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